रिश्वत लेते पकड़े गए डीएसपी, जमीन पर गिरकर छटपटाने लगे, अंगरक्षक के पास फेंका बैग; 30 हजार रुपये बरामद
मधुबनी में निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई, यातायात डीएसपी सुजीत कुमार अस्पताल में उपचार के बाद निगरानी टीम के साथ मुजफ्फरपुर रवाना
मधुबनी (बिहार), 27 अक्टूबर 2026
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान मधुबनी के यातायात पुलिस उपाधीक्षक सुजीत कुमार को 30 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। निगरानी ब्यूरो की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रैप की कार्रवाई के दौरान डीएसपी अचानक जमीन पर गिरकर छटपटाने लगे। जमीन पर गिरने से पहले उन्होंने रिश्वत की रकम रखे छोटे बैग को अपने अंगरक्षक की ओर फेंक दिया। अंगरक्षक ने बैग उठाया, जिसके बाद उसमें रखे 30 हजार रुपये बरामद किए गए।
घटना 27 अक्टूबर की शाम की है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने निगरानी थाना कांड संख्या 125/26 के तहत यह कार्रवाई की। ब्यूरो के अनुसार, गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान डीएसपी की तबीयत बिगड़ने पर टीम उन्हें तत्काल सदर अस्पताल, मधुबनी ले गई। चिकित्सकों ने उनका लगातार उपचार किया। स्वास्थ्य में सुधार और चिकित्सकीय अनुमति मिलने के बाद उनके हाथ धुलवाए गए और उन्हें विधिवत गिरफ्तार किया गया।
28 अक्टूबर की शाम चिकित्सकों ने उनकी स्थिति सामान्य बताते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अस्पताल से ले जाने की अनुमति दी। इसके बाद निगरानी टीम उन्हें सदर अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर निगरानी के विशेष न्यायालय, मुजफ्फरपुर में पेश करने के लिए रवाना हुई। मामले में आगे की जांच जारी है।
ट्रक छोड़ने के एवज में मांगी गई थी रिश्वत
निगरानी ब्यूरो की विज्ञप्ति के मुताबिक, इस मामले में परिवादी रोहित मिश्रा, निवासी गंधवारी, थाना सकरी, जिला मधुबनी ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि निजी काम के लिए पीला बालू लेकर घर लौटने के दौरान रांटी चौक पर उनकी टिपर गाड़ी को यातायात डीएसपी सुजीत कुमार ने रोक लिया था। गाड़ी छोड़ने के एवज में कथित तौर पर एक लाख रुपये की मांग की गई थी। परिवादी के अनुसार, दबाव में उन्होंने पहले 50 हजार रुपये दिए थे, जिसके बदले 500 रुपये का चालान काटा गया और चालान जमा करने के बाद गाड़ी छोड़ी गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि इसके बाद डीएसपी की ओर से कम से कम 20 हजार रुपये और देने का दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही गाड़ी चलाने के एवज में हर महीने 15 हजार रुपये देने की मांग किए जाने की बात भी कही गई।
शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि होने के बाद निगरानी थाना कांड दर्ज किया गया। इसके बाद वरीय पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 30 हजार रुपये बरामद किए गए। मामले में अनुसंधान जारी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में 115वां ट्रैप कांड
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के मामलों में अब तक 126 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इनमें एक मामला दूसरे जिले से स्थानांतरित होकर आया है, जिससे कुल अनुसंधानाधीन मामलों की संख्या 127 हो गई है। सुजीत कुमार के मामले को ब्यूरो ने वर्ष का 115वां ट्रैप कांड बताया है। ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, ट्रैप मामलों में अब तक 115 आरोपितों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। इन मामलों में कुल 40 लाख 19 हजार 400 रुपये की रिश्वत राशि बरामद होने की जानकारी दी गई है।

