NGT की संयुक्त उच्चस्तरीय टीम ने गड़खा में नदी का किया निरीक्षण, प्रदूषण मुक्ति और रिवर फ्रंट विकास की जगी उम्मीद
नालों का गंदा पानी और कचरे के अंबार से नदी की स्थिति खराब, छठ घाटों सहित संवेदनशील स्थलों का किया गया जायजा; शिकायतकर्ता ने 3D मॉडल के जरिए पेश की विकास योजना
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश पर गड़खा बाजार से गुजरने वाली ऐतिहासिक नदी की स्थिति का आकलन करने के लिए गठित संयुक्त उच्चस्तरीय जांच दल ने 28 अक्टूबर 2026 को नदी के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। स्थानीय निवासी निलेश कुमार की ओर से दायर याचिका पर कार्रवाई के तहत पहुंचे दल ने नदी में गिरने वाले नालों, कचरे के जमाव और छठ घाटों की स्थिति का जायजा लिया। इस निरीक्षण से नदी के प्रदूषण की समस्या दूर करने और क्षेत्र में रिवर फ्रंट विकसित करने की उम्मीदें बढ़ी हैं।
पर्यावरण और जिला प्रशासन के अधिकारी रहे शामिल
NGT के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय, रांची, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन, सारण के प्रतिनिधि शामिल रहे। टीम में अपर समाहर्ता, जिला समन्वयक, प्रखंड विकास पदाधिकारी, गड़खा तथा संबंधित प्रखंड समन्वयक भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता निलेश कुमार ने साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखी।
बाईपास पुल से छठ घाटों तक नदी की स्थिति का लिया जायजा
संयुक्त टीम ने गड़खा बाईपास स्थित पुल, गड़खा छठ घाट, गड़खा बाजार पुल के पास जमा कचरे और बीबीपुर छठ घाट सहित नदी के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। इस दौरान नदी में सीधे गिरने वाले बिना शोधन के नालों की स्थिति भी देखी गई। निरीक्षण प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि संबंधित स्थलों की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजीकरण किया जा सके।
निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति के अनुसार, बाईपास के अपस्ट्रीम क्षेत्र में तटबंध और सड़क का निर्माण हो चुका है, जबकि गड़खा बाजार और मीठेपुर छठ घाट की दिशा में तटबंध की कमी बताई गई। नदी की तलहटी में कचरा जमा होने से उसके उथले होने की समस्या भी सामने आई। बाजार और रिहायशी इलाकों का गंदा पानी बिना शोधन के नदी में गिरने से प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई गई। इसका असर छठ जैसे लोकआस्था के पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं और स्वच्छता पर भी पड़ता है।
3D मॉडल के जरिए पेश की गई रिवर फ्रंट विकास योजना
निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता निलेश कुमार ने नदी के पुनरुद्धार और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए दो विस्तृत 3D मॉडल के माध्यम से रिवर फ्रंट विकास योजना प्रस्तुत की। प्रस्ताव में नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने, जलीय जीवन के संरक्षण, दोनों किनारों पर वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र विकसित करने जैसे सुझाव शामिल हैं।
योजना के तहत नदी किनारे वॉकवे, जॉगिंग ट्रैक और ओपन जिम बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके अलावा पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर विकसित करने तथा नदी के आसपास के क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार करने की परिकल्पना की गई है।
वैकल्पिक मार्ग से जाम और आपातकालीन पहुंच की समस्या दूर करने का प्रस्ताव
प्रस्तावित योजना में छपरा रोड से गड़खा-बसंत रोड के बीच लगने वाले जाम को कम करने के लिए तटबंध मार्ग को वैकल्पिक रास्ते के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत हल्के वाहनों और ई-पब्लिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग की परिकल्पना की गई है।
खोदाईबाग चूड़ी बाजार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और पुलिस की त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके साथ ही नए और व्यवस्थित छठ घाट विकसित कर पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को अलग-अलग स्थानों पर बांटने, ग्रामीण इलाकों को राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने तथा सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं भी योजना में शामिल हैं।
नालों के शोधन और कचरा निस्तारण पर जोर
निरीक्षण के बाद संयुक्त जांच दल ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को नालों के सीवेज ट्रीटमेंट, कचरा निस्तारण और शुरुआती साफ-सफाई से जुड़े कार्यों के लिए समयबद्ध दिशा-निर्देश दिए। नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के साथ नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
संयुक्त जांच दल की ओर से जल्द ही विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है। अब इस मामले में रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर स्थानीय लोगों की नजर रहेगी। यदि प्रस्तावित योजनाओं पर प्रभावी ढंग से काम होता है, तो गड़खा की नदी के पुनरुद्धार के साथ क्षेत्र की स्वच्छता, जनसुविधाओं और स्थानीय विकास को भी गति मिल सकती है।

