छपरा में 20 हजार किताबों से सजा अनोखा पूजा पंडाल, गुरुकुल से AI तक की दिखी झलक
मोबाइल की लत छोड़ किताबों से दोस्ती करने का संदेश, महावीर पूजा सेवा समिति की पहल में शिक्षा और तकनीक के सदुपयोग पर जोर
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: किताबों से बढ़ती दूरी और मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छपरा शहर के इंदिरा नगर में एक अनोखा पूजा पंडाल लोगों का ध्यान खींच रहा है। महावीर पूजा सेवा समिति की ओर से करीब 20 हजार पुस्तकों से तैयार इस पंडाल में धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा, आधुनिक तकनीक और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया है। इसकी अनूठी बनावट लोगों को आकर्षित करने के साथ बच्चों और युवाओं को किताबों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
गुरुकुल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक की झलक
पंडाल में प्राचीन गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के आधुनिक दौर तक के सफर को कलात्मक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पेंसिल, बॉल पेन और पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्रियों को भी सजावट का हिस्सा बनाया गया है। हजारों पुस्तकों से तैयार इसकी संरचना शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है।
पंडाल के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, ज्ञान प्राप्त करने, विचारों को समझने और व्यक्तित्व निर्माण में पुस्तकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। किताबें केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने का जरिया भी हैं।
तकनीक से दूरी नहीं, सही इस्तेमाल जरूरी
समिति की यह पहल मोबाइल फोन के इस्तेमाल का विरोध करने के बजाय उसके संतुलित और उपयोगी प्रयोग पर जोर देती है। मोबाइल के जरिए ऑनलाइन पढ़ाई, नई जानकारियां हासिल करने और कौशल विकसित करने के अवसर उपलब्ध हैं। जरूरत इस बात की है कि तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने और लक्ष्य हासिल करने के लिए किया जाए, न कि उसका इस्तेमाल जीवन का अधिकांश समय खर्च करने में हो।
मोबाइल की लत पर जागरूकता का संदेश
पंडाल का प्रमुख संदेश मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से जुड़ी आदतों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। मोबाइल और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने से बच्चों और युवाओं की पढ़ाई, नींद, दिनचर्या और पारिवारिक संवाद प्रभावित हो सकते हैं।
इसी विषय को ध्यान में रखते हुए पंडाल में अलग-अलग कलात्मक माध्यमों से मोबाइल के दुरुपयोग के संभावित नुकसान को दर्शाया गया है। ध्यान भटकने, समय की बर्बादी और परिवार के सदस्यों के साथ संवाद कम होने जैसे मुद्दों के जरिए लोगों को अपनी आदतों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
पंडाल का संदेश है कि समय रहते अपनी आदतों में सुधार किया जाए, तो भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। मोबाइल का इस्तेमाल ज्ञान बढ़ाने के लिए करें, जिंदगी और अपनों से दूरी बनाने के लिए नहीं।
आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता की पहल
इंदिरा नगर स्थित महावीर पूजा सेवा समिति का यह पंडाल धार्मिक आयोजन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का उदाहरण है। करीब 20 हजार पुस्तकों से तैयार इसकी संरचना पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और शिक्षा के महत्व को समझाने का प्रयास करती है।
पंडाल देखने पहुंच रहे लोगों के लिए यह धार्मिक आस्था के साथ सीखने का भी अवसर है। बदलते दौर में जब स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय बढ़ रहा है, तब यह पहल किताबों, शिक्षा और पारिवारिक संबंधों के महत्व की ओर ध्यान खींचती है।
इस अनोखे पंडाल का संदेश स्पष्ट है कि किताबों से दोस्ती करें, तकनीक का सदुपयोग करें, परिवार को समय दें और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें। आज की अच्छी आदतें ही आने वाले कल को बेहतर बनाने की नींव रखती हैं।

