कैनवास पर सजी भोजपुरी लोकसंस्कृति की रंगीन दुनिया, सारण संग्रहालय में लोककला को नया रंग
तीन दिवसीय भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला के दूसरे दिन दर्जनों कलाकारों ने कैनवास पर उकेरीं पीड़िया, गोधन, कोहबर और भित्ति चित्रों की विविध छवियां
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: शहर का सारण संग्रहालय रविवार को भोजपुरी लोकजीवन के रंगों से सराबोर रहा। कहीं पीड़िया की लोकसंस्कृति आकार ले रही थी तो कहीं गोधन की परंपरा रंगों में ढल रही थी। कोहबर, तुलसी चौरा और भित्ति चित्रों के माध्यम से भोजपुरी समाज की लोक-संस्कृति कैनवास पर अपनी कहानी कहती नजर आई।
छपरा के पचमेल फाउंडेशन और पटना के आसरा सेवा केन्द्र के सौजन्य से आयोजित तीन दिवसीय भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला के दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए करीब दो दर्जन महिला एवं पुरुष कलाकारों ने अपनी तूलिका से भोजपुरी लोकजीवन के विविध रूपों को कैनवास पर उकेरा। कलाकारों ने पूरे दिन अपनी सृजनशीलता के माध्यम से उन लोक परंपराओं को रंग और आकार दिया, जो पीढ़ियों से भोजपुरी समाज के जीवन का हिस्सा रही हैं।
लोक परंपराओं को मिल रही नई पहचान
कार्यशाला में उभरते चित्रों में भोजपुरिया गांव का आंगन, लोक आस्था, संस्कार और पारंपरिक जीवनशैली अलग-अलग रंगों में दिखाई दी। इन चित्रों में केवल कलात्मक अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि तेजी से बदलते समय में पीछे छूटती लोक परंपराओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को सहेजने का प्रयास भी नजर आया।
पचमेल के निदेशक डॉ. पृथ्वीराज सिंह और डॉ. अमरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि एक ओर भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर चित्रकार भोजपुरी चित्रकला को देश-विदेश में पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी संस्कृति केवल भाषा, गीत, नृत्य और साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी अपनी समृद्ध चित्र परंपरा भी है।
वहीं शिवानुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि सारण संग्रहालय में उभर रहे ये रंग भोजपुरी लोकजीवन की उन स्मृतियों को सहेजने का प्रयास हैं, जिन्हें कलाकार आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक दस्तावेज का रूप देने में जुटे हैं।
सोमवार को चित्रों की प्रदर्शनी और परिचर्चा
कार्यशाला की व्यवस्था में जुटे अमन सिंह और भंवर निगम ने बताया कि सोमवार को कार्यशाला के अंतिम दिन कलाकारों द्वारा तैयार चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही भोजपुरी चित्रकला के स्वरूप और विस्तार को लेकर परिचर्चा आयोजित होगी।
परिचर्चा में बिहार कला मंच के वीरेंद्र सिंह, पद्मश्री श्याम शर्मा और बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक सिन्हा सहित कला एवं साहित्य क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग अपने विचार रखेंगे।
सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल होंगे मुख्य अतिथि
कार्यशाला के समापन समारोह में महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल मुख्य अतिथि होंगे, जबकि छपरा विधायक छोटी कुमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी।
कार्यशाला के माध्यम से भोजपुरी लोककला की पारंपरिक विधाओं को आधुनिक कैनवास पर स्थान देने के साथ-साथ उन्हें नई पीढ़ी और व्यापक कला जगत तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

