50 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी दोषी करार, 3-3 वर्ष की सजा
पटना (बिहार) | 18 अगस्त 2026
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अनुसंधान किए गए रिश्वतखोरी के एक मामले में पटना स्थित विशेष न्यायालय निगरानी ने अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया है। विशेष न्यायालय के माननीय न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने निगरानी थाना कांड संख्या-13/2010 (विशेष वाद संख्या-10/2010) में मंगलवार को अपना फैसला सुनाया।
मामला वर्ष 2010 का है। अभियोजन के अनुसार, परिवादी बैद्यनाथ पंडित प्रभाकर, वर्तमान प्रभारी प्रधानाध्यापक, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सरारी, प्रखंड मोहनपुर, जिला समस्तीपुर, के विद्यालय का निरीक्षण अभियुक्त विनोद कुमार विमल द्वारा किया गया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की कैश बुक, साइट बुक सहित अन्य कागजात बिना जप्ति सूची बनाए अपने कब्जे में ले लिए गए थे।
अभियोजन के मुताबिक, इन कागजातों को वापस करने और विद्यालय के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने के एवज में परिवादी से 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। मामले की शिकायत निगरानी विभाग से किए जाने के बाद कार्रवाई की गई और 10 फरवरी 2010 को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए विनोद कुमार विमल को गिरफ्तार किया गया था।
मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता मृत्युंजय कुमार चौधरी, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल 11 साक्षियों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना विजय भानू ने प्रभावी पैरवी की, जिसके बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत विनोद कुमार विमल को तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर चार महीने के साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े कुल 16 मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो ने कहा है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है और भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में कार्रवाई जारी रहेगी।
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