चला मुसाफिर......
✍️बिजेन्द्र कुमार तिवारी (बिजेन्दर बाबू)
अंजानी मंजिल सखे, अंजाना है राह
चला मुसाफिर मौज में, बिना किये परवाह।
सूझ न सत् पथ की उसे, नहीं कुपथ का भान
यश-अपयश फेर नहीं, पाप-पुण्य का ज्ञान।
ना बंधन का भय है उसको, ना मुक्ति की चाह
चला मुसाफिर मौज में, बिना किये परवाह।
वो दरिया का मौज मनोरम, खुद हीं राह बनाये
मस्त पवन का झोंका है वह, सदा मगन धुन गाये।
सदा कर्मपथ चलता प्यारे, बिना निकाले आह
चला मुसाफिर मौज में, बिना किये परवाह।
बादल-सा है नम्र हृदय वह, सदा प्रेम बरसाये
वो निर्झर-सा झर-झर कर पावन संदेश सुनाये।
औरों के दुख में दुख समझे, करे वाह में वाह
चला मुसाफिर मौज में, बिना किये परवाह।
सेवा धर्म समझता है वह, माया से अंजान
सादगीमय शुभ उसका जीवन, निर्मलता पहचान।
सुन बिजेन्द्र सत्कर्मों पर है, उसकी सदा निगाह
चला मुसाफिर मौज में, बिना किये परवाह।
अंजानी मंजिल सखे, अंजाना है राह
चला मुसाफिर मौज में, बिना किये परवाह।
✍️बिजेन्द्र कुमार तिवारी (बिजेन्दर बाबू)
गैरतपुर, माँझी, सारण, बिहार 📱7250299200

