बलिया के कृषि विद्यार्थियों का KVK मांझी में शैक्षणिक भ्रमण, आधुनिक कृषि तकनीकों की दी गई जानकारी
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: श्री मुरली मनोहर टाउन पी.जी. कॉलेज, बलिया, उत्तर प्रदेश के बीएससी कृषि चतुर्थ सेमेस्टर के 112 छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), मांझी, सारण में आयोजित किया गया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, उद्यानिकी तथा फसल उत्पादन की नवीन तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र सारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर.के. तिवारी, प्रो. बृजेश सिंह, प्रो. विजयानंद पाठक, डॉ. जितेन्द्र चंद्र चंदोला, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. संजीत कुमार सिंह, डॉ. जय प्रकाश सिंह, डॉ. कौशल कुमार पाण्डेय एवं डॉ. विजय कुमार उपस्थित रहे।
कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों से कराया परिचित
डॉ. आर.के. तिवारी ने विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा की शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. जितेन्द्र चंद्र चंदोला ने विद्यार्थियों को पोषण वाटिका, उद्यानिकी फसलों, फल एवं सब्जी उत्पादन तथा पोषण सुरक्षा के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने में उद्यानिकी फसलों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
आधुनिक कृषि मशीनों का दिया गया व्यावहारिक ज्ञान
डॉ. सुषमा टम्टा ने विद्यार्थियों को कृषि यंत्रीकरण एवं आधुनिक कृषि मशीनरी की जानकारी दी। विद्यार्थियों को जीरो टिलेज मशीन, लेजर लैंड लेवलर, मल्टी-क्रॉप प्लांटर और बूम स्प्रेयर का व्यावहारिक परिचय कराया गया।
उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से समय, श्रम, बीज और पानी की बचत के साथ कृषि लागत कम करने तथा खेती की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। विद्यार्थियों को धान की खेती में गीला-सूखा विधि (Alternate Wetting and Drying-AWD), जल संरक्षण और वैज्ञानिक सिंचाई प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई।
मृदा परीक्षण और औषधीय पौधों की जानकारी
डॉ. विजय कुमार ने विद्यार्थियों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के महत्व और उनके उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से मृदा नमूना लेने, मृदा परीक्षण और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व को भी समझाया।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में स्थापित विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों एवं तकनीकी केंद्रों का अवलोकन किया। इनमें टेक्नोलॉजी पार्क, कृषि मशीनरी इकाई, सीड हब, प्राकृतिक खेती इकाई तथा अमरूद, नींबू और लीची की सघन बागवानी प्रमुख रहे।
प्राकृतिक खेती और गाजर घास नियंत्रण की जानकारी
विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों और टिकाऊ कृषि तकनीकों से भी परिचित कराया गया। इसके अलावा पार्थेनियम (गाजर घास) जागरूकता अभियान के तहत गाजर घास की पहचान, इसके दुष्प्रभाव तथा इसके नियंत्रण एवं प्रसार को रोकने के उपायों की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को जीरो टिलेज तकनीक से न्यूनतम जुताई में फसल स्थापना, लेजर लैंड लेवलर से खेत में सिंचाई जल के समान वितरण, मल्टी-क्रॉप प्लांटर से समय एवं श्रम की बचत और बूम स्प्रेयर से कम समय में प्रभावी फसल संरक्षण दवाओं के छिड़काव के बारे में भी बताया गया।
112 विद्यार्थियों ने लिया भाग
शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक कृषि परिस्थितियों से जोड़ना और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराना रहा।
विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों एवं आधुनिक कृषि मशीनरी में विशेष रुचि दिखाई। विद्यार्थियों ने बताया कि इस प्रकार के भ्रमण से उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने में काफी मदद मिली।
कार्यक्रम में कुल 112 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र मांझी के अमितेश कुमार गौरव, राकेश कुमार, उमाशंकर कुमार एवं अवनीश कुमार पाण्डेय ने सहयोग किया।

