जिला स्तरीय उर्दू वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा, 99 हजार रुपये की पुरस्कार राशि वितरित
उर्दू की तरक्की के लिए सरकार के साथ आम अवाम को भी आगे आना होगा : डीएम
जिला उर्दूनामा पत्रिका का हुआ लोकार्पण, मैट्रिक, इंटर और स्नातक स्तर के प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: भाषा हमें सभ्य बनाती है। उर्दू किसी एक कौम की भाषा नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से भारत की भाषा है। उर्दू मीठी और प्यारी जुबान होने के साथ-साथ गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक भी है। इसकी तरक्की के लिए सरकार के साथ आम अवाम को भी आगे आना होगा। उक्त बातें जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने गुरुवार को प्रेक्षागृह में आयोजित जिला स्तरीय उर्दू वाद-विवाद प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में कहीं।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के उर्दू निदेशालय की ओर से उर्दू भाषी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्घाटन जिलाधिकारी एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी सहित अन्य अतिथियों ने जिला उर्दूनामा पत्रिका का लोकार्पण भी किया।
डीएम ने कहा कि उर्दू भाषा को लेकर समाज में व्याप्त गलत धारणाओं और दुर्भावनाओं को दूर करने की जरूरत है। जिला उर्दू भाषा कोषांग को हर महीने इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, ताकि ज्ञान और विचारों का आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने लोगों से रोजमर्रा की जिंदगी में उर्दू को शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि अंग्रेजी और हिंदी की तरह उर्दू भाषा की भी नियमित शिक्षा जरूरी है। तभी सही मायने में इसका विकास संभव हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि भाषा की तरक्की और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार हर साल इस तरह के आयोजन कराती है। इसका मकसद आम लोगों के बीच उर्दू भाषा को भी अन्य भाषाओं की तरह प्रोत्साहित करना है।
अतिथियों का स्वागत करते हुए जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी सह उप निर्वाचन पदाधिकारी जावेद एकबाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रोत्साहन से विद्यार्थियों का हौसला बढ़ता है और वे पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं।
उन्होंने बताया कि उर्दू निदेशालय की उर्दू भाषी विद्यार्थी प्रोत्साहन राज्य योजना के तहत मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर पर अलग-अलग विषयों में वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए प्रो. शमीम परवेज, प्रो. शकील अनवर और डॉ. वलीउल्लाह कादरी की तीन सदस्यीय निर्णायक मंडली गठित की गई थी।
99 हजार रुपये की पुरस्कार राशि वितरित
प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में सफल प्रतिभागियों के बीच कुल 99 हजार रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई। मैट्रिक स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को 4500 रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले तीन प्रतिभागियों को 3500-3500 रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले चार प्रतिभागियों को 2500-2500 रुपये दिए गए।
इंटरमीडिएट स्तर पर प्रथम स्थान के लिए 5500 रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले तीन प्रतिभागियों को 4500-4500 रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले चार प्रतिभागियों को 3500-3500 रुपये प्रदान किए गए।
स्नातक स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को 6500 रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले तीन प्रतिभागियों को 5500-5500 रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले चार प्रतिभागियों को 4500-4500 रुपये दिए गए। सभी विजेताओं को पुरस्कार राशि के साथ मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं, प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र दिया गया।
इन्हें किया गया सम्मानित
मैट्रिक स्तर पर नरगिस बानो ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जासमीन, शाहीना और तबस्सुम को द्वितीय तथा शमा, मो. दिनकश, हबीबा और नगमा को तृतीय पुरस्कार मिला।
इंटरमीडिएट स्तर पर फरहत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कायनात, नौशीन और आएशा को द्वितीय तथा जीनत, शादिया, नेमत और तबस्सुम को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
स्नातक स्तर पर शायका ने प्रथम स्थान हासिल किया। नुजहत, सना और सानिया को द्वितीय तथा मुस्कान, शबाना, नरगिस और अफशां को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को स्थापना उप समाहर्ता गुलाब हुसैन, एनडीसी रवि कुमार, ओएसडी मिंटू चौधरी, जुनैद मीर, मो. इसलामुद्दीन और नेसार अहमद सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के सफल संयोजन में जिला उर्दू भाषा कोषांग के मो. रियाजुद्दीन अहमद, मो. हारून रशीद, मो. तारिक, नूर फातमा, आयुष कुमार, मो. शाहनवाज सहित अन्य कर्मियों ने सहयोग किया।

