सारण: मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी ने रावण को तो भ्राता लक्ष्मण ने मेघनाथ का किया वध
जिला प्रशासन के सहयोग से रावण वध समिति के संयुक्त प्रयास से सफल रहा विजयादशमी समारोह
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गौरवशाली धरती के साथ साथ कौमी एकता की भी धरती रही है, जहां सभी जाति और धर्मों के लोग आपसी परस्पर समन्वय से एक दूसरे के धार्मिक उत्सव में बढ़ चढ़ कर सहयोग करते आ रहे हैं। जिसका उदाहरण प्रमंडलीय मुख्यालय सारण के छपरा शहर स्थित राजेंद्र स्टेडियम में दुर्गापूजा के बाद होने वाले रावण वध शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया।
सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार के संयुक्त नेतृत्व में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा दुर्गा पूजा के विभिन्न आयोजनों को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। वहीं विधि- व्यवस्था संधारण, भीड़ प्रबंधन एवं आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रावण दहन के आयोजन स्थल (राजेंद्र स्टेडियम) सहित पूरे रावण दहन जुलूस मार्ग पर आवश्यक प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी।
रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र और भ्राता लक्ष्मण के अलावा हमुनान की सेना कचहरी स्टेशन के नजदीक से रथ पर सवार होकर बैंड बाजे के साथ योगिनियां कोठी, नगर पालिका चौक, थाना चौक, डाकबंगला रोड होते हुए प्रवेश किया। राजेंद्र स्टेडियम में जैसे ही रथ प्रवेश किया जयकारे के साथ स्वागत किया गया। हजारों की संख्या में राम भक्तों का उत्साह चरम पर था।
रावण दहन कार्यक्रम समारोह की ओर से बताया गया कि लगभग 90 फीट ऊंचे रावण एवं 80 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य तथा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। विजयादशमी का पर्व समाज को अहंकार, अन्याय एवं बुराइयों का त्याग कर सत्य, सदाचार और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
वहीं जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के संयुक्त प्रयासों तथा प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं कर्मियों की सक्रिय भूमिका से रावण दहन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विजयादशमी का यह पर्व अपने मूल संदेश के अनुरूप समाज में सद्भाव, सकारात्मकता एवं अच्छाई की विजय का संदेश देता है। कार्यक्रम के दौरान दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई थी। साथ ही, किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से त्वरित रूप से निपटने तथा जरूरतमंदों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेडिकल टीमों की व्यवस्था भी की गई थी।

