आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग
विश्व आयुर्वेद परिषद ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा देने की मांग को लेकर विश्व आयुर्वेद परिषद की ओर से जिलाधिकारी, छपरा के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। परिषद ने आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक आधुनिक तकनीकी संसाधनों और आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित करने की भी मांग की।
परिषद के अनुसार, संगठन राष्ट्रोत्थान को केंद्र में रखते हुए स्व-जागरण और आयुर्वेद के समग्र उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। परिषद ने बताया कि वह पिछले 29 वर्षों से आयुर्वेद के विकास एवं उत्थान के लिए सक्रिय है।
ज्ञापन में केंद्र सरकार द्वारा आयुर्वेद के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आयुर्वेद के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। कोरोना काल के दौरान आयुर्वेद के माध्यम से किए गए प्रयासों को भी परिषद ने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा देने की मांग
परिषद ने ज्ञापन में कहा कि स्वतंत्रता के करीब 80 वर्ष बाद भी आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा प्राप्त नहीं है और इसे अभी भी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में देखा जाता है। परिषद का कहना है कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति और जीवन का विज्ञान है।
परिषद के मुताबिक, आयुर्वेद के मनीषियों ने ज्ञान, तर्क, तथ्य और अनुसंधान के आधार पर इसकी चिकित्सा अवधारणाओं को विकसित किया। वर्तमान समय में वैद्य और आयुर्वेद विशेषज्ञ भी आधुनिक वैज्ञानिक मानकों तथा निरंतर अनुसंधान के माध्यम से इसे अधिक साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
‘पुरानी नींव, नया निर्माण’ पर जोर
ज्ञापन में ‘पुरानी नींव, नया निर्माण’ की अवधारणा के तहत आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। परिषद ने प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों से लेकर उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक आधुनिक तकनीकी संसाधन, चिकित्सा सुविधाएं और मजबूत आधारभूत व्यवस्था विकसित करने की मांग की।
परिषद का कहना है कि आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा मिलने से देश की प्राचीन चिकित्सा परंपरा को नई पहचान मिल सकती है और यह स्व-जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. कमलेश कुमार शर्मा, डॉ. उमाकांत प्रसाद, डॉ. आलोक चंद पाण्डेय, डॉ. विजय कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह तथा प्रांत महासचिव डॉ. सुधांशु शेखर त्रिपाठी शामिल रहे।

