सारण के हरेश कुमार की कोचिंग में चमका भारत, एशियन गेम्स में गोल्ड के साथ ओलंपिक कोटा
चिकिथा-साहिल की जोड़ी ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम में जीता स्वर्ण, लॉस एंजिल्स-2028 के लिए भारत का पहला कोटा हासिल; मशरक के कोडराव गांव से अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी तक पहुंची हरेश कुमार की पहचान
धर्मेंद्र रस्तोगी | छपरा, 02 अक्टूबर 2026
सारण के मशरक प्रखंड के छोटे से गांव कोडराव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी के मंच तक अपनी पहचान बनाने वाले हरेश कुमार की उपलब्धियों में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजी टीम के साथ जुड़े हरेश कुमार के मार्गदर्शन में भारतीय तीरंदाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है।
कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में चिकिथा तनिपार्थी और साहिल राजेश जाधव की भारतीय जोड़ी ने स्वर्ण पदक जीतकर न केवल भारत को गौरवान्वित किया, बल्कि लॉस एंजिल्स-2028 ओलंपिक के लिए भारत का पहला कोटा भी सुनिश्चित किया।
शूटआउट में भारत ने जीता ऐतिहासिक स्वर्ण
फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी का सामना दक्षिण कोरिया के पार्क जोंगयून और चोई योंगही से हुआ। निर्धारित मुकाबला 157-157 की बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद हुए शूटआउट में भारतीय जोड़ी ने 20-19 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
इस जीत के साथ भारत ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा के जरिए लॉस एंजिल्स-2028 ओलंपिक के लिए अपना पहला कोटा हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय तीरंदाजी के लिए विशेष महत्व रखती है।
कोडराव से अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी तक हरेश कुमार का सफर
सारण जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत कोडराव गांव निवासी हरेश कुमार वर्तमान में भारतीय तीरंदाजी से जुड़े वरिष्ठ प्रशिक्षक हैं। एशियन गेम्स में वह भारतीय पुरुष टीम के कोच की भूमिका में हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय तीरंदाजों को तैयार करने के लंबे अनुभव के कारण हरेश कुमार ने देश के महत्वपूर्ण तीरंदाजी प्रशिक्षकों में अपनी पहचान बनाई है। सारण के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि जिले की मिट्टी से निकला एक प्रशिक्षक अब भारतीय तीरंदाजी के अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनकर एशियाई मंच पर देश के खिलाड़ियों की सफलता में योगदान दे रहा है।
हरेश कुमार की यात्रा ग्रामीण बिहार से अंतरराष्ट्रीय खेल जगत तक प्रतिभा और प्रशिक्षण की संभावनाओं की कहानी भी बयां करती है।
साहिल जाधव की दोहरी स्वर्णिम सफलता
हरेश कुमार की प्रशिक्षण यात्रा की प्रमुख उपलब्धियों में साहिल राजेश जाधव का राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना भी शामिल है।
साहिल ने एशियन गेम्स में पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद चिकिथा तनिपार्थी के साथ कंपाउंड मिक्स्ड टीम में भी स्वर्ण जीतकर उन्होंने दोहरी सफलता दर्ज की।
हरेश कुमार का नाम अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज अंजली कुमारी के प्रशिक्षण से भी जुड़ा रहा है। उनके मार्गदर्शन में तैयार खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
ग्रामीण परिवेश से खेलों के अंतरराष्ट्रीय मंच तक
सिवान जिले के भगवानपुर हाट प्रखंड के रामपुर कोठी गांव से सटे पूर्व मशरक प्रखंड के कोडराव जैसे ग्रामीण परिवेश से निकलकर भारतीय तीरंदाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित करने तक हरेश कुमार का सफर सारण और बिहार के खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
एशियन गेम्स में भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी ने महिला टीम, पुरुष टीम और मिश्रित टीम—तीनों वर्गों में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी मजबूती दिखाई। मिश्रित टीम का स्वर्ण पदक और इसके साथ मिला ओलंपिक कोटा इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।
हरेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के कोच के रूप में काम करने के बाद कोलकाता के साल्ट लेक स्थित खेलो इंडिया केंद्र में मुख्य प्रशिक्षक की जिम्मेदारी भी संभाली है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय तीरंदाजों की सफलता में उनका योगदान अब सारण की खेल पहचान को भी नई ऊंचाई दे रहा है।

