बिहार के 38 जिलों में बनेंगे आशा घर, 39 स्वास्थ्य संस्थानों में होगी व्यवस्था
सारण के नगरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी सूची में किया गया शामिल, आशा कार्यकर्ताओं को अस्पताल परिसर में मिलेगा सुरक्षित रात्रि विश्राम
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार में आशा कार्यकर्ताओं को अस्पताल परिसर में सुरक्षित रात्रि विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य के सभी 38 जिलों में आशा घर स्थापित करने की योजना के तहत कुल 39 स्वास्थ्य संस्थानों को चिह्नित किया गया है। इनमें 14 जिला अस्पताल, एक अनुमंडलीय अस्पताल और 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इस योजना के तहत सबसे पहले कैमूर जिले के अधौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा घर स्थापित किया गया है।
सारण जिले के नगरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी आशा घर स्थापित करने के लिए चिह्नित किया गया है। इससे क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने और मरीजों के साथ स्वास्थ्य संस्थानों में रुकने के दौरान सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा सुरक्षित ठहराव
आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और जरूरत पड़ने पर उनके साथ अस्पताल में रुकने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं। कई बार प्रसव और मरीजों की देखभाल के कारण उन्हें रात में भी अस्पताल में रहना पड़ता है। ऐसे में आशा घर की व्यवस्था से उन्हें आराम करने और बुनियादी सुविधाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा।
कैमूर जिले के अधौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा घर स्थापित हो चुका है। वहां की आशा कार्यकर्ता रंजू देवी के अनुसार, इस सुविधा से कार्यकर्ताओं को अस्पताल में ठहरने और आराम करने में मदद मिलती है। इससे प्रसूता की देखभाल करने और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समन्वय बनाए रखने में भी सहूलियत होती है।
महिला वार्ड के पास होंगे छह बिस्तर
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आशा घर अस्पताल परिसर में महिला वार्ड के नजदीक बनाया जाएगा। इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर पहले से उपलब्ध खाली कमरे का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक आशा घर में कम से कम छह बिस्तरों की व्यवस्था अनिवार्य होगी। दो बिस्तरों के बीच कम से कम तीन फीट की दूरी रखनी होगी।
प्रत्येक बिस्तर के साथ दस्तावेज और जरूरी सामान रखने के लिए छोटी अलमारी उपलब्ध कराई जाएगी। कमरे में दो पंखे, बेडशीट, तकिये, तकिया कवर, छह कंबल, पर्याप्त ट्यूबलाइट और बल्ब तथा छह कुर्सियों की व्यवस्था होगी। सर्दियों में उपयोग के लिए हीटर का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्नानागार और शौचालय की सुविधा भी अनिवार्य होगी।
इन जिलों के अस्पतालों में होगी व्यवस्था
आशा घर के लिए अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, रोहतास, सहरसा, समस्तीपुर, शेखपुरा और सुपौल के जिला अस्पतालों को चिह्नित किया गया है। इसके अतिरिक्त नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी आशा घर की व्यवस्था की जाएगी। इनमें अरवल का कलेर, बांका का धोरैया, भोजपुर का गड़हनी, बक्सर का ब्रह्मपुर, दरभंगा का सिंहवाड़ा, गया का वजीरगंज, जमुई का झाझा, जहानाबाद का रतनी फरीदपुर, कैमूर का अधौरा, किशनगंज का कोचाधामन, लखीसराय का हलसी, मधेपुरा का बिहारीगंज, मुंगेर का असरगंज, मुजफ्फरपुर का कुढ़नी, नवादा का अकबरपुर, पश्चिम चंपारण का योगापट्टी, पटना का फुलवारीशरीफ, पूर्णिया का बरहरा कोठी, समस्तीपुर का सरायरंजन, सारण का नगरा, शिवहर का पिपराही, सीतामढ़ी का रुन्नीसैदपुर, सिवान का रघुनाथपुर और वैशाली का लालगंज शामिल हैं।
समस्तीपुर जिले के जिला अस्पताल और सरायरंजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दोनों को सूची में शामिल किए जाने के कारण 38 जिलों के लिए स्वास्थ्य संस्थानों की कुल संख्या 39 है।
पांच सदस्यीय समिति करेगी संचालन
आशा घर के सुचारु संचालन के लिए पांच सदस्यीय संचालन समिति गठित की जाएगी। इसमें तीन आशा फैसिलिटेटर और दो आशा कार्यकर्ता शामिल होंगी। समिति के सदस्यों का चयन आशा फैसिलिटेटरों के समूह द्वारा किया जाएगा।
आशा घर के संचालन में अस्पताल प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक भी सहयोग करेंगे। संचालन समिति की बैठक प्रत्येक तीन महीने पर होगी। बैठक की कार्यवाही राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के आशा संसाधन केंद्र को उपलब्ध करानी होगी।
रजिस्टर में दर्ज होगा ठहरने का विवरण
आशा घर का उपयोग केवल आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर कर सकेंगी। किसी प्रसूता या मरीज को लेकर अस्पताल आने पर आशा कार्यकर्ता यहां ठहर सकेंगी। इसके लिए एक रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें ठहरने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर का नाम दर्ज करना अनिवार्य होगा।
निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, आशा घर में मरीजों के रिश्तेदारों या आशा कार्यकर्ताओं के अन्य परिजनों को ठहरने की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं को सुरक्षित और सुविधाजनक ठहराव उपलब्ध कराना है, ताकि वे गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की अपनी जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभा सकें।

