खरगे की टिप्पणी से लोकतांत्रिक मर्यादा तार-तार, कांग्रेस नेतृत्व की सोच उजागर: राजीव प्रताप रूडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता के संदर्भ में की गई टिप्पणी को सांसद ने बताया निंदनीय, कांग्रेस नेतृत्व से आत्ममंथन की अपील
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने खरगे की टिप्पणी को अत्यंत निंदनीय और चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह की भाषा देशवासियों और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को स्वीकार्य नहीं है।
सांसद रूडी ने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संविधान और राष्ट्रपति का भी अपना विशिष्ट महत्व है, लेकिन इस पूरी व्यवस्था में प्रधानमंत्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है।
रूडी ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे एक अनुभवी नेता हैं और उनसे सार्वजनिक जीवन में अधिक जिम्मेदार एवं मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरगे ने जिस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल किया, वह उचित नहीं है। रूडी के मुताबिक, यह बयान देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना है।
सांसद ने कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का असर उसके नेतृत्व की भाषा और आचरण में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने खरगे की टिप्पणी के पीछे की मानसिकता और राजनीतिक दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाए। रूडी ने कहा कि यदि कांग्रेस नेतृत्व इसी प्रकार की भाषा और सोच के साथ आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में पार्टी के अस्तित्व और राजनीतिक प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
रूडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता के संदर्भ में की गई टिप्पणी घोर निंदनीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद के बावजूद संवैधानिक पदों की गरिमा और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
सांसद ने कांग्रेस नेतृत्व से आत्ममंथन करने और भविष्य में इस तरह की टिप्पणियों की पुनरावृत्ति रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को अपनी भाषा एवं आचरण के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए।

