मजदूर नहीं मिले तो किसान सलाहकार ने बदली धान की खेती की राह
अभाव बना आविष्कार की वजह, रोपाई छोड़ खेत में छिड़का बिचड़ा, लहलहा उठा फसल
मांझी के गोबरही टोला निवासी अरुण सिंह ने एक बीघे में किया श्री विधि का प्रयोग, कभी लोग उड़ाते थे मजाक, अब फसल देखने पहुंच रहे किसान
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: कहा जाता है कि अभाव ही नए आविष्कार की जननी होता है। इसका एक उदाहरण मांझी प्रखंड के गोबरही टोला गांव में देखने को मिला है। धान की रोपाई के लिए मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी ने किसान सलाहकार अरुण कुमार सिंह को खेती का नया तरीका आजमाने के लिए प्रेरित किया। उत्तर प्रदेश के किसानों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने धान के बिचड़े की पारंपरिक रोपाई के बजाय उसे सीधे खेत में छिड़ककर खेती करने का प्रयोग किया। शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, लेकिन आज खेत में लहलहाती बासमती धान की फसल उनके प्रयोग की सफलता की कहानी बयां कर रही है।
मांझी प्रखंड के गोबरही पंचायत के गोबरही टोला गांव निवासी स्वर्गीय अर्जुन सिंह के पुत्र अरुण कुमार सिंह वर्तमान में एकमा प्रखंड में किसान सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करीब एक बीघा खेत में हाइब्रिड बासमती धान की श्री विधि से खेती का प्रयोग किया है।
रोपाई छोड़ सीधे खेत में डाला बिचड़ा
अरुण सिंह के सामने सबसे बड़ी समस्या धान की रोपाई के लिए मजदूरों की उपलब्धता और बढ़ती मजदूरी थी। उन्होंने बताया कि मजदूर नहीं मिलने और महंगी मजदूरी के कारण खेती की लागत बढ़ रही थी। इसी दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा अपनाई जा रही पद्धति की जानकारी मिली।
इसके बाद उन्होंने धान के बिचड़े को खेत में रोपने के बजाय गीली मिट्टी में एक-एक बिचड़ा सीधे छिड़ककर फसल तैयार करने का प्रयोग शुरू किया।
शुरुआत में आसपास के लोगों को उनका यह तरीका अजीब लगा। लोगों ने यहां तक कहा कि बिना रोपाई के धान की फसल कैसे तैयार होगी और प्रयोग से पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। कुछ लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया। लेकिन अरुण सिंह ने आलोचनाओं की परवाह किए बिना प्रयोग जारी रखा।
अब लहलहा रही बासमती, देखने पहुंच रहे लोग
कुछ समय बाद जब खेत में धान की फसल बढ़ने लगी तो लोगों का नजरिया बदल गया। आज खेत में लहलहाती हाइब्रिड बासमती धान की फसल देखकर आसपास के लोग भी आश्चर्यचकित हैं। क्षेत्र में अरुण सिंह की खेती की चर्चा होने लगी है।
अरुण सिंह का कहना है कि उन्होंने सामान्य खेती की तरह ही खेत में खाद का इस्तेमाल किया है। प्रयोग सफल होने के बाद उनका उत्साह बढ़ा है और वे आगे भी इस पद्धति से खेती जारी रखने की बात कह रहे हैं।
मजदूरों पर निर्भरता कम करने की कोशिश
अरुण सिंह के अनुसार, इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य धान की खेती में मजदूरों पर निर्भरता कम करना और लागत को नियंत्रित करना है। यदि यह पद्धति स्थानीय परिस्थितियों में सफल रहती है तो धान की रोपाई के समय किसानों को मजदूरों की कमी से होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के किसानों से मिली जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने यह प्रयोग किया। उनके अनुसार, श्री विधि की तर्ज पर धान के पौधों को उचित दूरी और तरीके से विकसित करने का प्रयास किया गया है।
अरुण सिंह ने कहा कि खेत में खड़ी फसल को देखकर उनका मन प्रसन्न है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका प्रयोग दूसरे किसानों को भी खेती में नए तरीके आजमाने के लिए प्रेरित करेगा।
इस प्रयोग को देखने और चर्चा करने के लिए आसपास के लोग भी पहुंच रहे हैं। मौके पर संतोष कुमार सिंह, प्रियंका सिंह, शंकर सिंह, दूधनाथ यादव सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।
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