श्री पी. एल. आठिया की स्मृति में हिन्दी भाषा एवं साहित्य संवर्धन हेतु सम्मानों की श्रृंखला प्रारंभ
✍️ प्रेरणा बुडाकोटी
27 अक्टूबर 2026
हिन्दी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को सम्मान देने, शिक्षा-जगत की उत्कृष्ट सेवाओं को रेखांकित करने तथा शोध-अनुसंधान एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति समर्पित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “स्व. श्री पी. एल. आठिया स्मृति सम्मान” आरम्भ किए जा रहे हैं। अक्टूबर 2026 से प्रारम्भ यह सम्मान-परंपरा उन व्यक्तित्वों के योगदान को सार्वजनिक पहचान देने का प्रयास है, जिन्होंने अपने लेखन, अध्यापन, शोध, संपादन और हिन्दी-सेवा के माध्यम से समाज तथा ज्ञान-जगत को समृद्ध किया है।
इस सम्मान-परंपरा के प्रेरणास्रोत दीपशिखा 501 पुस्तक श्रृंखला के निदेशक एवं प्रधान संपादक डॉ सीताराम आठिया के पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री पी. एल. आठिया जी , जो हिन्दी के विद्वान, उत्कृष्ट वक्ता और समर्पित शिक्षाविद् एवं प्राचार्य थे। वे शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल, देवरी, जिला सागर (मध्य प्रदेश) में वर्ष 2011 से 2015 तक प्राचार्य रहे। हिन्दी भाषा के प्रति अनुराग, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व-निर्माण की भावना उनके जीवन की प्रमुख विशेषताएँ थीं। उनकी स्मृति को रचनात्मक और समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ना ही इन सम्मानों की मूल भावना है।
इस पहल के अंतर्गत डॉ. ज्योति शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, छत्तीसगढ़ को “भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर उत्कृष्ट शोध-पत्र लेखन के लिए प्रथम “पी. एल. आठिया स्मृति हिन्दी गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया है।
सम्मान-परंपरा के अंतर्गत हिन्दी साहित्य सम्मान, हिन्दी विद्वत् सम्मान, आदर्श शिक्षक सम्मान, साहित्य साधना सम्मान, राष्ट्रभाषा सेवा सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, साहित्य रत्न सम्मान, साहित्य सृजन सम्मान, उत्कृष्ट प्राचार्य सम्मान, शिक्षक गौरव सम्मान, हिन्दी सेवी सम्मान, आजीवन साहित्य साधना सम्मान तथा नवोदित साहित्य प्रतिभा सम्मान सहित कुल 13 सम्मान प्रदान किए जाएंगे। इन सम्मानों के माध्यम से स्थापित साहित्यकारों, हिन्दी के विद्वानों, भाषा-विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, प्राचार्यों, संपादकों, कवियों, लेखकों, हिन्दी प्रचारकों और उभरती साहित्यिक प्रतिभाओं के उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित किया जाएगा।
इन सम्मानों का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का अभिनंदन करना नहीं, बल्कि हिन्दी भाषा के संवर्धन, साहित्यिक सृजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मौलिक शोध, ज्ञान के प्रसार और समाजोपयोगी बौद्धिक कार्यों को नई प्रेरणा देना है।
हिन्दी सेवियों, शिक्षाविदों का विश्वास है कि स्व. श्री पी. एल. आठिया जी की स्मृति में आरम्भ की गई यह सम्मान-परंपरा हिन्दी-सेवियों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को प्रेरित करेगी तथा भाषा, साहित्य और ज्ञान-साधना के क्षेत्र में सार्थक योगदान को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनेगी।

