मांझी-गुठनी मुख्य मार्ग पर ताजपुर पुल से छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू, बैरिकेडिंग की ऊंचाई बढ़ाई गई
तीन महीने से बंद था चारपहिया वाहनों का रास्ता, जर्जर पुल से अब बोलेरो, स्कॉर्पियो और एंबुलेंस भी गुजर सकेंगे; भारी वाहनों पर रोक बरकरार
सारण (बिहार): मांझी-गुठनी मुख्य मार्ग पर दाहा नदी के ताजपुर पुल से छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू होने से आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों को राहत मिली है। सोमवार को प्रशासन ने जर्जर पुल पर लगाई गई बैरिकेडिंग की ऊंचाई बढ़ाकर छोटे चारपहिया वाहनों के गुजरने का रास्ता खोल दिया। अब इस पुल से बोलेरो, स्कॉर्पियो और एंबुलेंस जैसे वाहन भी आर-पार जा सकेंगे। हालांकि, पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए भारी और लोडेड वाहनों के परिचालन पर रोक बरकरार है।
बताया जाता है कि करीब तीन महीने पहले पुल को जर्जर और असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग कर दी थी। इससे छपरा और सीवान को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर चारपहिया वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई थी। इसका असर आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों पर पड़ा। पुल से केवल साइकिल और बाइक के गुजरने की स्थिति में एंबुलेंस, स्कूली वाहनों और अन्य छोटे चारपहिया वाहनों को भी काफी परेशानी हो रही थी।
शुरुआत में सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग किए जाने को कई लोगों ने सही कदम बताया था, लेकिन धीरे-धीरे आवागमन में आ रही परेशानियों के कारण इसे हटाने या इसमें बदलाव करने की मांग तेज होने लगी। इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने भी प्रशासन के समक्ष आवाज उठाई। पैक्स अध्यक्ष संत सिंह ने भी पुल पर खड़े होकर बैरिकेडिंग हटाने की मांग की थी।
इसके बाद मांझी प्रखंड के पूर्व प्रमुख रामकृष्ण सिंह, भाजपा नेता एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह समाज समेत अन्य स्थानीय नेताओं की पहल पर प्रशासन ने बैरिकेडिंग की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद छोटे चारपहिया वाहनों के लिए रास्ता खुल गया। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन और स्थानीय नेताओं ने लोगों से अपील की है कि पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारी वाहनों और अधिक लोड वाले वाहनों को इससे न गुजारें। पुल अभी भी जर्जर अवस्था में है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। छोटे वाहनों को गुजरने की अनुमति मिलने के बावजूद बड़े हादसे की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
बताया जाता है कि इस पुल का उद्घाटन 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा किया गया था, जो मात्र तीन साल में ही दो पाये क्रैक कर गए। वहीं जगह जगह से टूटने भी लगा। वहां पुल निर्माण कंपनी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे।
वहीं बैरिकेटिंग के बाद विगत कुछ महीने से चली आ रही परेशानी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ताजपुर पुल का स्थायी समाधान कब होगा। महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने तीन महीने के भीतर नए पुल के निर्माण का आश्वासन दिया था। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस दिशा में जल्द ठोस पहल करेंगे, ताकि मांझी-गुठनी मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह सुचारु हो सके और लोगों को बार-बार की परेशानी से स्थायी राहत मिल सके।

